न्याय!!

img-20160925-wa0003

न्याय!!

यहाँ हर सच एक दरवाज़े में बंद है

इसलिए तो झूठ बिना सच के भी बुलंद है

सच को हर कटघरे में खड़ा किया जाता है

तारीख पर तारीख देकर उसे भी झूठ करार दिया जाता है

अंत तक संघर्ष करने के बाद भी

क्यूँ सच अनसुना रह जाता है?

 

बचपन से हमे सच कहना सिखाया है जाता

पर सच अपनाने का एक भी उदाहरण नहीं दिया जाता

मेरी नज़र मे सच कहना बड़ी बात नहीं है

सच सुनकर उसे अपनाना बड़ी बात है|

 

जब एक लड़की का शोषण हुआ तब न्यायालय ने सबूत माँगा

जब एक ग़रीब के साथ अन्याय हुआ तब भी न्यायालय ने सबूत माँगा

पर माँगा उससे जिसने यह सब सहा

ना की उससे जिसने यह सब करा

सोचो अगर आप खुद उस जगह होते तो सबूत इकट्ठा करते या खुद को बचाते

कुछ ऐसे ही सवाल मुझे और मेरे जैसे लाख़ों को हर रात है सताते|

 

यह नहीं कहूँगी की सच को न्याया नहीं मिलता

ना यह कहूँगी की सच को खुद को साबित करने का मौका नहीं मिलता

पर मेरा सवाल यह है कि

मौके और न्याय तक का यह फासला सच बोलने वाला ही क्यूँ तय करता है

क्यूँ सत्यमेव जयते का पलड़ा एक तरफ झुका रहता है.

 

रिया शर्मा