अनोखा एहसास

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अनोखा एहसास

जब तेरी नन्ही आँखों ने पहली बार मुझे देखा था
दुनिया की ना जाने किस खुशी का एहसास मेरे चेहरे पर झलका था

जब तेरे नन्हे हाथों ने पहली बार मेरे हाथ को पकड़ा था
उसी समय भरोसे से भरा एक वादा तुझसे किया था

जब पहली बार मुझे देख तू मुस्कुराया था
जो कह ना सकु उस खुशी का सैलाब आया था

वो दिन भी मुझे याद है जब तू मेरी ओर घुटनों के बल चला आया था
और खींच कर मेरे सर को अपनी गोदी मे रख सहलाया था

और जब भी तू मेरे पास बड़े सुकून से सोता था
उस लम्हे को वहीं रोक लेने का दिल करता था

आज भी तुझे गोदी मे खिलाने का, तेरे साथ घूमने जाने का दिल करता है
यह सिर्फ़ एक माँ का नहीं, एक मोसी का दिल भी यही कहता है.

तेरे साथ नहीं फिर भी हर रोज तुझे याद करती हूँ
तुझसे जल्दी मिलने की कोशिश दिन रात करती हूँ

तेरी हर ख़्वाहिश पूरी कर सकूँ इसीलिए यह दूरियाँ सहती हूँ
जिस दिन तू मुझे मोसी कहकर पुकारे उस दिन का इंतेज़ार बेसब्री से करती हूँ|

रिया शर्मा

मुखौटा

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मुखौटा

यहाँ हर सख़्श एक मुखौटा पहने घूम रहा है
एहेंकार के नशे मे बिना पिए झूम रहा है
दर दर भटकते ग़रीबों की कमाई पर आसमान छू रहा है
यहाँ हर सख़्श एक मुखौटा पहने घूम रहा है

कोई हस्ते हस्ते अपना गम बयान कर रहा हैं
कोई शराफ़त का चौला डाले शरीफों का खनन कर रहा है
कोई जात पात की आड़ मे अपनो का ही कत्ल कर रहा है
यहाँ हर सख़्श एक मुखौटा पहने घूम रहा है

अपने ही साथियो को अपने ही पैरों तले कुचल रहा है
ना जाने ये मनुष्य ऐसी कामयाबी पर कैसे इठलाए जा रहा है
कहीं ना कहीं हर इंसान अंधकार की झोली मे झुकता चला जा रहा है
यहाँ हर सख़्श एक मुखौटा पहने घूम रहा है|

रिया शर्मा